Ishq Likhun Ya Inqulaab – इश्क़ लिखूँ या इन्‍कलाब

इश्क़ लिखूँ या इन्कलाब झाँसी लिखूँ, मंगल लिखूँ और सुभाष लिखूँ,या शाहजहां और मुमताज लिखूँ,लिखूँ राँझा और हीर या फिरभगत, उद्यम, आज़ाद लिखूँ।लिखूँ गोरी के कंगन-काजल,या फिर जालिया वाला बाग लिखूँ।मेरी कलम मुझसे पूछ रही:इश्क लिखूँ या इन्क़लाब लिखूँ। मैं उलझ जाऊँ जिस्मों में,वादों और कसमों मेंक्या वो भोग विलास लिखूँ।या जो क्षण में रण …

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