Apni alag pahchan bana – अपनी अलग पहचान बना

अपनी अलग पहचान बना… लिख रही है नियति गाथा, कदमों के कुछ निशान बना। रख खुद पे भरोसा तू, कुल , ऊंची शान बना। बदल दे अपनी दुनिया, नई धरती, नया आसमान बना, अपनी अलग पहचान बना। अपनी अलग पहचान बना। राह जो जग ने दिखाईतो चलने का क्या मतलब है?गैरों के शर्तों पर जियें,क्या …

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