व्यक्तिगत, व्यावसायिक और सामाजिक जीवन में संतुलन
ब्रह्मांड के संचालन से लेकर मानव शरीर के निर्माण व जीवन निर्वह्न में सामंजस्य का बहुत महत्व है। व्यक्ति के जीवन निर्वहन की प्रकृति उसके व्यक्तिगत आवश्यकताओं को जन्म देती है। व्यक्तिगत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मनुष्य अपने ज्ञान और कौशल के अनुरूप व्यवसाय करता है, व्यवसाय उसे समाज से जुड़ने का अवसर देता है। एक ही व्यक्ति आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए व्यक्तिगत, व्यवसायिक और सामाजिक क्रियाकलापों को करता है इसलिए इनके बीच भी सामंजस्य होना अति आवश्यक है। सामंजस्य के अभाव में व्यक्ति तनाव से ग्रसित होता है जो उसके जीवन में उमंग को दुष्प्रभावित करता है।